Jharkhand हेमन्त सोरेन की गिरफ़्तारी वैध अवैध ईस पर सुप्रीम कोर्ट में आज होगी सुनवाई
Ranchi:झारखंड का मुख्यमंत्री पर पिछले कुछ महीने पहले मनी लांड्रिंग मामले में परिवर्तन निदेशालय (ईडी)द्वारे हेमंत सोरेन को गिरफ़्तार किया गया था!
हेमन्त सोरेन की गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाले याचिका पर मंगलवार को सुनवायी की.
पीएमएलए की धारा 19 के प्रवादनो के तहत हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी वैध है या अवैध?
और भूमि घोटाले से जुड़े और मनि लॉन्ड्रिंग मामले में (ईडी) के द्वारा गिरफ़्तार की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सोरेन की याचीका पर 21 मई को न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायाधीश दीपा कर दत्त की पीठ में सुनवाई हुई.
सुनवाई के दौरन हेमन्त सोरेन की और कपिल सिब्बल ने दलील दी सुनवाई के पहले चरण में उनको कहा ईडी ने बड़गांई की जिस जमीन के मामले में हेमंत सोरेन को गिरफ़्तार किया है वह ज़मीन हेमन्त सोरेन की नहीं है.यह भुइहारी जमीन है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस दत्ता ने कहा कि अगर हम गिरफ्तारी को अवैध मानते हैं, तो इन 2 आदेशों का क्या होगा? सिब्बल ने कहा कि वे खत्म हो जाएंगे.
जस्टिस दत्ता ने कहा कि वे क्यों हट जाएंगे? यह न्यायिक निष्कर्ष हैं, जिन्हें चुनौती नहीं दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि हेमंत सोरेन को अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती. जस्टिस दत्ता ने कहा कि अंतरिम आदेश नहीं हो सकता. सिब्बल ने कहा कि मैं जमानत नहीं मांग रहा हूं, मैं कह रहा हूं कि सब मान लो, फिर भी कोई केस नहीं है.
दोनों पक्षों की तरफ से पेश की गईं ये दलीलें
सोरेन की तरफ दलीलें पेश करते हुए उनके वकील सिब्बल ने कहा कि कुल 12 भूमि के टुकड़े हैं और मैं उस समय चार साल का था जब इन भूमि का हस्तांतरण हुआ. सिब्बल ने कहा कि 2009-10 में मैंने यह जमीन ली थी. इसके बाद अप्रैल 2023 में ईडी ने शिकायत दर्ज की. इस बीच किसी ने भी शिकायत नहीं की. वहीं, ईडी की तरफ से एएसजी राजू ने कहा कि वह केवल वही पढ़ रहे हैं जो उनके लिए सुविधाजनक है. सिब्बल ने कहा कि ईडी की रिपोर्ट से पता चलता है कि परिसर में एक अस्थायी बंदोबस्त था और उसमें मौजूद महिला ने कहा कि जमीन हेमंत सोरेन की है और एक अन्य ने यह भी कहा कि यह मंत्रीजी की है. इस पर राजू ने कहा कि सिब्बल साहेब नहीं बताएंगे कि विवाद क्या है.
यह केजरीवाल जैसा मामला नहीं- ED
राजू ने कहा कि हाईकोर्ट में भी समान याचिका दायर की गई थी लेकिन अब वह लोकसभा चुनाव के मद्देनजर केजरीवाल के आदेश आधार पर अंतरिम राहत मांगने लगे. जबकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सब स्पष्ट किया है. राजू ने कहा कि जमीन सोरेन के नाम जरूर नहीं थी. लेकिन उनका कब्जा गैरकानूनी तरीके से था जो किसी और के नाम करायी गई दो ट्राइबल नहीं था. राजू ने कहा कि संतोष मुंडा जमीन के केयरटेकर बनाए गए थे. राजू ने पीएमएलए की धारा 45 पर बहस करने लगे. इस पर सिब्बल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मैं उस पर नहीं जाना चाहता, सिर्फ अंतरिम राहत चाहता हूं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने आपकी जमानत याचिका खारिज की है और कोर्ट संज्ञान भी ले चुका है.
हाई कोर्ट में दो महीने तक लंबित रही याचिका- सिब्बल
सिब्बल ने कहा कि मैंने गिरफ्तारी को HC में चुनौती दी. यह 2-2.5 महीने तक लंबित रही. मैं जमानत नहीं मांग सकता. जस्टिस दत्ता ने कहा कि जब यह लंबित था, तब आपने जमानत के लिए आवेदन किया था. सिब्बल ने कहा कि हमने कहा बिना किसी पूर्वाग्रह के किया था।
सिब्बल ने कहा कि धारा 45 और धारा 19 के स्तर पर लागू नहीं होता. जस्टिस दत्ता ने कहा कि हमें एक न्यायिक मिसाल दिखाएं.
जमीन पर गैरकानूनी कब्जा शेड्यूल ऑफेंस नहीं- सिब्बल
जस्टीस दत्ता ने कहा कि यहां कुछ तथ्यात्मक असमानताएं हैं. संज्ञान ले लिया गया है, इसलिए कोर्ट प्रथम दृष्टया संतुष्ट है. सिब्बल ने कहा कि सोरेन को 31 जनवरी को गिरफ्तार किया गया, धारा 19 लगाई गई. उस तिथि पर उनके पास पीएमएलए लागू करने के लिए कुछ भी नहीं था. सिब्बल ने कहा कि जमीन पर गैरकानूनी कब्जा शेड्यूल ऑफेंस नहीं है. जस्टिस दत्ता ने कहा कि जब एक न्यायिक फोरम प्रथम दृष्टया निष्कर्ष पर आ गया है, और इसे चुनौती नहीं दी गई है, तो क्या एक रिट के तहत अदालत अभी भी गिरफ्तारी की वैधता पर गौर करेगी?